टी20 फॉर्मेट में क्या अलग होता है
टी20 क्रिकेट में बीस ओवर का दबाव हर गेंद को निर्णायक बना देता है। पहले छह ओवर के पावरप्ले में केवल दो फील्डर बाहरी सर्कल में हो सकते हैं, जिससे बल्लेबाज़ों को खुला मैदान मिलता है। मध्य ओवर में स्पिनर अक्सर रन-रोक की भूमिका निभाते हैं, जबकि सोलह से बीस के बीच तेज़ गेंदबाज़ों की यॉर्कर और स्लोअर बॉल निर्णायक हथियार बन
जाते हैं। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में खेले जाने वाले टी20 मुकाबलों में ओस का असर पिच व्यवहार को पूरी तरह बदल सकता है। iv7 पर यह सामग्री केवल क्रिकेट-केंद्रित खेल जानकारी के रूप में प्रस्तुत की जाती है।